मैं एक नामी इंटरनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। मेरी दुनिया कोडिंग, बग्स और डेडलाइन्स के इर्द-गिर्द घूमती है। उस दिन ऑफिस में काम का पहाड़ टूटा था। घड़ी में रात के 10 बज रहे थे, लेकिन मेरी उंगलियाँ अभी भी कीबोर्ड पर तेज़ी से चल रही थीं। पूरा ऑफिस खाली हो चुका था, बस कुछ लाइटें जल रही थीं।
मेरे अलावा वहां एक लड़की और रुकी थी। शायद उसका भी कोई बड़ा प्रोजेक्ट अधूरा था। मैंने उसे पहले मीटिंग्स में एक-दो बार देखा था, पर हम कभी मिले नहीं थे। काम का प्रेशर इतना था कि मुझे न भूख का अहसास था, न प्यास का। बस दिमाग में एक ही धुन सवार थी—काम खत्म करना है।
तभी वह मेरे पास आई। उसने धीरे से पूछा, “मुझे थोड़ा काम खत्म करना है और मैं इस बड़े ऑफिस में अकेली हूँ, तो क्या मैं यहाँ आपके पास बैठकर काम करूँ तो चलेगा?”
मैंने बिना उसकी ओर देखे बस इतना ही कहा, “इट्स ओके, बैठ जाइए।”
सच कहूँ तो उस वक्त मुझ पर काम का भूत इस कदर सवार था कि मेरे अंदर किसी से बात करने की ज़रा भी इच्छा नहीं थी। वर्क प्रेशर ने मुझे जैसे दबा दिया था। रात के 9:30 बजे उसने फिर टोकते हुए पूछा, “कुछ ऑनलाइन खाना मंगा लूँ? तुम क्या खाओगे?”
मैंने सादगी से मना कर दिया, “नहीं, मुझे भूख नहीं है।”
पर वह नहीं मानी। वह मेरे और करीब आकर बैठ गई और बोली, “खाली पेट दिमाग नहीं चलता। मैं सैंडविच मंगा रही हूँ, थोड़ा खा लेना।” उस रात पहली बार काम के बीच किसी ने मेरा ध्यान भटकाया था, पर वह अच्छा लग रहा था। मैंने काम खत्म किया, उसके साथ सैंडविच खाया और हम ऑफिस से बाहर निकले।
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अजीब मोड़ और वो रात
ऑफिस के बाहर सन्नाटा था। उसने पूछा, “घर कैसे जाओगे?” मैंने कहा, “बस या ऑटो देख लूँगा।” वह अपनी स्कूटी की चाबी घुमाते हुए बोली, “मेरी टू-व्हीलर है, चलो साथ चलते हैं।”
मुझे थोड़ा अजीब (awkward) लगा, पर उस समय कोई सवारी भी नहीं दिख रही थी। उसने मुझे गाड़ी चलाने को कहा और खुद पीछे बैठ गई। कुछ दूर जाने के बाद उसने एक ऐसी बात कही जिसने मुझे चौंका दिया— “आज तुम मेरे रूम पर रुक जाओ, सुबह चले जाना।”
मैंने तुरंत मना कर दिया, “थैंक्स, पर मैं अपने घर निकल जाऊँगा।” वह मुस्कुराई और बोली, “ठीक है, पहले तुम्हारे घर चलते हैं, मुझे वहां ड्रॉप करके मैं अपने घर निकल जाऊँगी।”
मेरा घर काफी दूर था। जब हम मेरे घर के पास पहुँचे, तो वह अचानक रुक गई। चेहरे पर थोड़ा डर था। वह बोली, “तुम्हारा घर तो बहुत दूर है। अब इतनी रात को मुझे अकेले घर जाने में डर लग रहा है। क्या मैं आज रात तुम्हारे घर रुक सकती हूँ?”
अब मेरे सामने धर्मसंकट था। ‘हाँ’ कहना गलत लग सकता था और ‘ना’ कहना इंसानियत के नाते ठीक नहीं था। मैंने उलझन में बस सिर हिला दिया।
मेरा छोटा सा 1BHK फ्लैट था। मैं अनुशासन प्रिय इंसान हूँ, मुझे मेरा घर एकदम साफ-सुथरा पसंद है। मैंने उसे कहा, “आप बेडरूम में सो जाइए, मैं हॉल में सो जाऊँगा।”
जैसे ही वह अंदर गई, उसने सारा सामान इधर-उधर बिखेर दिया। जहाँ मैं हर चीज़ सलीके से रखता था, वहां अब उसका ‘पसारा’ था। वह फ्रेश होकर सो गई, पर मेरी नींद उड़ चुकी थी। मैं बस सुबह होने का इंतज़ार कर रहा था। अगले दिन छुट्टी थी, मुझे लगा वह जल्दी उठकर चली जाएगी, पर वह सुबह 10 बजे तक सोती रही।
मैंने सुबह 6 बजे उठकर सफाई की, खाना बनाया और दो कप चाय बनाई। एक कप उसके कमरे के बाहर टेबल पर रख दिया। मैंने उसे जगाने के लिए उसके फोन पर कॉल किया, पर उसने बिना देखे फोन साइलेंट कर दिया और फिर सो गई।
आखिरकार 10 बजे मैंने आवाज़ दी, “मैडम, उठिए, आपको घर जाना है न?”
हैरान कर देने वाला खुलासा
वह उठी, फ्रेश हुई और मेरा घर देखकर दंग रह गई। उसने कहा, “तुम्हारा घर कितना साफ और व्यवस्थित है। आई लाइक इट।”
हमने साथ में नाश्ता किया। निकलते वक्त उसने मुझसे एक सवाल पूछा, “क्या तुम्हें पता है कंपनी में मेरी पोज़िशन क्या है?” मैंने कहा, “नहीं।”
उसने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं इस कंपनी की Assistant General Manager (AGM) हूँ। और मैं कल तुम्हारे प्रमोशन के लिए HR से बात करूँगी। मुझे तुम्हारा एटीट्यूड बहुत पसंद आया। इतना सीधा और अनुशासित इंसान मैंने पहली बार देखा है। मैं तुम्हारे घर पर अकेली थी, फिर भी तुमने मेरी तरफ गलत नज़र से नहीं देखा। आई एम प्राउड ऑफ यू।”
अगले हफ्ते मेरा प्रमोशन हो गया। ज़िम्मेदारियां बढ़ीं और मेरा रुतबा भी।
कैफेटेरिया का वो प्रपोज़ल
एक दिन उसने मुझे कैफेटेरिया में बुलाया। मैं थोड़ा डरा हुआ था कि कहीं कोई गलती तो नहीं हो गई। जब मैं वहां पहुँचा, वह एक मिनट तक बिना पलकें झपकाए मुझे देखती रही। न चेहरे पर मुस्कान थी, न गुस्सा।
घबराहट में मैंने सिर नीचे किया और पूछा, “मैडम, क्या मुझसे कोई गलती हुई है?” कुछ पल की खामोशी के बाद वह बोली, “क्या तुम मुझसे शादी करोगे?”
मेरी साँसें जैसे अटक गईं। मुझे लगा शायद मैंने गलत सुना। मैंने हकलाते हुए पूछा, “मैडम, मैं कुछ समझा नहीं?” उसने मेरा हाथ पकड़ा, एक प्यारी सी मुस्कान दी और फिर दोहराया, “Will you marry me?”
मुझे पसीना आने लगा, गला सूख गया। वह समझ गई और बोली, “चिंता मत करो, सोचकर बताना। मुझे लगता है मुझे मेरे पसंद का लड़का मिल गया है। मैं इंतज़ार करूँगी।” और वह चली गई।
हकीकत या इम्तिहान?
मुझे लगा यह कोई प्रैंक है या शायद वह मेरा टेस्ट ले रही है। मैंने फैसला किया कि मैं कोई जवाब नहीं दूँगा। अगले दिन शाम को मैं बस स्टॉप पर खड़ा था कि तभी वह अपनी स्कूटी से आई और बोली, “बैठो!”
मैंने मना किया, “मैडम, बस आती ही होगी।” उसने अधिकार से कहा, “मैंने कहा न बैठो!”
हम एक कॉफी शॉप में गए। उसने अपनी ज़िंदगी, अपने माता-पिता और अपनी पसंद के बारे में बताया। वह एक अमीर पद पर थी, लेकिन उसकी सोच बहुत साधारण थी। मैंने भी अपने मिडिल क्लास परिवार के बारे में सब सच-सच बता दिया।
मैंने पूछा, “तुम इस रिश्ते को लेकर सीरियस क्यों हो? मुझमें ऐसा क्या देखा?” उसने बड़ी सादगी से जवाब दिया, “मेरा सपना था कि मेरा जीवनसाथी मैच्योर हो, ज़िम्मेदार हो और औरतों की इज़्ज़त करना जानता हो। जब से तुमसे मिली हूँ, ऐसा लगता है कि सब कुछ परफेक्ट है।”
मैंने ‘हाँ’ कह दिया।
एक नई शुरुआत
हमारी शादी हो गई। आज मैं भी एक बड़ी कंपनी में General Manager हूँ और मेरी पत्नी अपनी खुद की सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी चलाती है।
मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनाई थी, कभी इधर-उधर वक्त ज़ाया नहीं किया। मैंने हमेशा अपने काम और अपनी ग्रोथ पर ध्यान दिया। मैं भगवान से बस यही कहता था, “मेरे नसीब में जो लिखा है, उस पर मुझे भरोसा है।”
और वह भरोसा सच साबित हुआ। मेरी पत्नी न केवल सुंदर और सफल है, बल्कि वह बहुत ही समझदार और रिश्तों के प्रति समर्पित भी है।
Moral of the Story (कहानी की सीख):
- चरित्र ही आपकी असली पहचान है: जब आप अकेले होते हैं और कोई नहीं देख रहा होता, तब आपका आचरण ही यह तय करता है कि आप असल में कौन हैं। अनुशासन और शालीनता कभी बेकार नहीं जाती।
- काम के प्रति वफादारी: जब आप अपने काम को पूरी ईमानदारी से करते हैं, तो सफलता और अवसर खुद चलकर आपके पास आते हैं।
- धैर्य का फल: ज़रूरी नहीं कि आप हर चीज़ के पीछे भागें। अगर आप खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देंगे, तो सही समय पर सही इंसान और सही अवसर आपकी ज़िंदगी में ज़रूर आएंगे।
- सादगी में ही सुंदरता है: पद और प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर इंसान के संस्कार ही उसे महान बनाते हैं।
